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तुगलक वंश की स्थापना कब हुई थी | तुगलक वंश का संस्थापक कौन था - तुगलक वंश in Pdf

 तुगलक वंश की स्थापना कब हुई थी | तुगलक वंश का संस्थापक कौन  : नमस्कार दोस्तों हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको "तुगलक वंश की स्थापना कब हुई थी | तुगलक वंश का संस्थापक कौन " के बारे में बतायेंगें. तो आइये जानते है तुगलक वंश के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी 

तुगलक वंश की स्थापना कब हुई थी :

  • गाजी मलिक ने 5 सितम्बर 1398 ई० को खिलजी वंश के शासक खुसरो खां को पराजित करके गाजी मलिक या तुगलक गाजी ग्यासुदीन तुगलक के नाम से 8 सितम्बर 1320 ई० को दिल्ली की गद्दी पर बैठा .


तुगलक वंश का संस्थापक कौन था ?

तुगलक वंश का संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक था .

ग्यासुदीन तुगलक   
  • गाजी मलिक खुसरो कहाँ को पराजित कर ग्यासुदीन तुगलक के नाम से 8 सितम्बर 1320 ई० को  दिल्ली की गद्दी पर बैठा .
  • ग्यासुदीन तुगलक ने 29 बार मंगोल आक्रमणों को विफल किया .
  • माना जाता है ग्यासुदीन तुगलक ऐसा पहला शासक था जिसने सिंचाई व्यवस्था में सुधार के लिए कई नहरों एवं कुओं का निर्माण कराया .
  • ग्यासुदीन तुगलक ने दिल्ली के समीप तुगलकाबाद नामक नया नगर स्थापित किया .
  • इसने तुगलकाबाद में छप्पनकोट के नाम से एक दुर्ग बनवाया , जिसे रोमन शैली में बनवाया गया था .
  • गयासुदीन तुगलक की म्रत्यु 1325 ई० में हुई . ग्यासुदीन तुगलक की म्रत्यु बंगाल अभियान से लौटते हुए जुना कहाँ द्वारा बनवाये गए लकड़ी के महल में दबकर हुई .  


                                   मुहम्मद बिन तुगलक   (1325 ई० - 1351 ई०)


  • गयासुदीन तुगलक की म्रत्यु के बाद  जुना खां मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा .
  • ऐसा मना जाता है की मुहम्मद बिन तुगलक मध्यकालीन सभी सुल्तानों में से सबसे अधिक शिक्षित , विद्वान एवं बहुत ही योग्य व्यक्ति था .
  • उसको उसकी सनक भरी योजनाओ के कारण तथा क्रूर क्रत्यो तथा किसी के प्रति सुख दुःख का भाव न रखने के कारण उसे स्वपनशील , पागल एवं रक्तपिपासु भी कहा गया है .
  • मुहम्मद बिन तुगलक के द्वारा राजधानी दिल्ली से बदलकर देवगिरी कर दी गयी तथा इसका नाम बदलकर दौलताबाद कर दिया गया .
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने पीतल (फरिश्ता के अनुसार) तथा तांबा (बरनी के अनुसार) धातुओ के सिक्के चलाये .  
  • अफ़्रीकी यात्री इब्न बतूता 1333 ई० में भारत आया . मुहमद बिन तुगलक ने इसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया .
  • 1342 ई० में मुहमद बिन तुगलक ने इब्न बतूता को अपने राजदूत के रूप चीन भेजा .
  • इब्न बतूता की पुस्तक रेहला में मुहम्मद बिन तुगलक के समय की घटनाओ का वर्णन मिलता है .इब्न बतूता की पुस्तक में उस समय की गुप्तचर व्यवस्था , विदेशी व्यापार , डाक चौकियो  की स्थापना के बारे में लिखा है .
  • मुहम्मद बिन तुगलक की म्रत्यु 20 मार्च 1351 ई० को सिंध जाते समय थट्टा के निकट गोडाल में हो गयी .

तुगलक वंश से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न जो परीक्षाओ में पूछे जाते है :

Q ) तुगलक वंश की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :- तुगलक वंश की स्थापना 8 सितम्बर 1320 में हुई थी .

Q ) तुगलक वंश के किस शासक को रक्त का प्यासा कहा जाता है ?
उत्तर :- मुहम्मद बिन तुगलक.

Q ) तुगलक वंश का संस्थापक कौन था ?
उत्तर :- गयासुद्दीन तुगलक तुगलक वंश का संस्थापक था.

Q ) गयासुद्दीन की मृत्यु के बाद दिल्ली का सुल्तान कौन बना ?
उत्तर :- मुहम्मद बिन तुगलक गयासुद्दीन की म्रत्यु के बाद दिल्ली की गद्दी पर बैठा.

Q ) तुगलक वंश का पागल बादशाह कौन था ?
उत्तर :- मुहम्मद बिन तुगलक को अपनी असफल योजनाओ के लिए तुगलक वंश के पागल बादशाह के रूप में जाना जाता है.

Q ) तुगलक वंश से संबंधित मुख्य सुधार कार्य क्या है ? 
उत्तर :- तुगलक वंश के शासको ने विभिन्न क्षेत्रो में सुधार किये जिनमे मुख्यतः निम्न क्षेत्र है - 

1. आर्थिक सुधार : गयासुद्दीन तुगलक ने आर्थिक सुधार के अन्तर्गत अपनी आर्थिक नीति का आधार संयम, सख्ती एवं नरमी के मध्य संतुलन (रस्म-ए-मियान) को बनाया. गयासुद्दीन तुगलक ने लगान के रूप में उपज का 1/10 या 1/11 हिस्सा ही लेने का आदेश जारी कराया . 

ग़यासुद्दीन ने मध्यवर्ती ज़मीदारों विशेष रूप से मुकद्दम तथा खूतों को उनके पुराने अधिकार लौटा दिए, जिससे उनको वही स्थिति प्राप्त हो गयी, जो बलबन के समय में प्राप्त थी. ग़यासुद्दीन ने अमीरों की भूमि पुनः लौटा दी. उसने सिंचाई के लिए कुँए एवं नहरों का निर्माण करवाया.

 सम्भवतः नहर का निर्माण करवाने वाला ग़यासुद्दीन प्रथम सुल्तान था. अलाउद्दीन ख़िलजी की कठोर नीति के विरुद्ध उसने उदारता की नीति अपनायी, जिसे बरनी ने 'रस्मेमियान' अथवा 'मध्यपंथी नीति' कहा है।

2. राजस्व सुधार : दिल्ली की गद्दी पर बैठने के बाद ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने अमीरों तथा जनता को प्रोत्साहित किया. गयासुद्दीन तुगलक तुर्की मूल का था जिसके कारण इस कार्य में उसे कोई विशेष कठिनाई नहीं हुई. उसने कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों के हितों की ओर ध्यान दिया. उसने एक वर्ष में इक्ता के राजस्व में 1/10 से 1/11 भाग से अधिक की वृद्धि नहीं करने का आदेश दिया. उसने सिंचाई के लिए नहरें खुदवायीं तथा बाग़ लगवाए.

3. सार्वजनिक सुधार : गयासुद्दीन तुगलक ने जनता की सुविधा के लिए अपने शासन काल में क़िलों, पुलों और नहरों का निर्माण कराया. सल्तनत काल में डाक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का श्रेय ग़यासुद्दीन तुग़लक़ को ही जाता है. ‘बरनी’ ने अपनी किताब में डाक-व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया है. शारीरिक यातना द्वारा राजकीय ऋण वसूली को उसने प्रतिबंधित किया.

Q ) मुहम्मद बिन तुगलक की प्रशासनिक व्यवस्था ?
उत्तर :- मुहम्मद बिन तुगलक ने सिंहासन पर बैठने के उपरांत  अमीरों एवं सरदारों को विभिन्न उपाधियाँ एवं पद प्रदान किये. उसने तातार ख़ाँ को 'बहराम ख़ाँ' की उपाधि, मलिक क़बूल को 'इमाद-उल-मुल्क' की उपाधि एवं 'वज़ीर-ए-मुमालिक' का पद दिया था, किन्तु कुछ समय के बाद  में उसे 'ख़ानेजहाँ' की उपाधि दी गई और गुजरात का हाक़िम बनाया गया. मुहम्मद बिन तुगलक मलिक अरूयाज को ख्वाजा जहान की उपाधि के साथ ‘शहना-ए-इमारत’ का पद, मौलाना ग़यासुद्दीन को  'कुतुलुग ख़ाँ'  की उपाधि के साथ 'वकील-ए-दर' की पदवी, अपने चचेरे भाई फ़िरोज शाह तुग़लक़ को 'नायब बारबक' का पद प्रदान किया था.

Q ) गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु कैसे हुई थी ?
उत्तर :-  इब्न बतूता के अनुसार गयासुद्दीन की हत्या उसके पुत्र ज़ौना खाँ (मुहम्मद बिन तुगलक) द्वारा रचे गए षड्यंत्र के माध्यम से की गई.


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