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Saturday, July 20, 2019

Uttrakhand GK IN Hindi , Uttrakhand GK Question in Hindi | उत्तराखंड सामान्य ज्ञान

Uttrakhand GK IN Hindi , Uttrakhand GK Question in Hindi - उत्तराखण्ड  उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण 9 नवम्बर 2000 ई० को किया गया जो  की कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था . सन 2000 से 2006 तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया . राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं . पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं.

Uttrakhand GK IN Hindi , Uttrakhand GK Question in Hindi | उत्तराखंड सामान्य ज्ञान

आज इस पोस्ट में हम आपको उत्तराखंड राज्य के सामान्य ज्ञान से सम्बंधित अति महत्वपूर्ण प्रश्नों के बारे में बताने जा रहे है .

उत्तराखंड राज्य में होने वाली भर्ती परीक्षाओ में Uttrakhand GK , Uttrakhand GK in Hindi , उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से सम्बंधित बहुत अधिक मात्रा में प्रश्न  पूछे जाते है .

1. उत्तराखंड राज्य का गठन कब किया गया ?
उत्तर - 1 नवम्बर , 2000.
Q 2. उत्तराखंड राज्य की राजधानी है -
उत्तर - देहरादून.
Q 3. उत्तराखंड राज्य में जिलो की संख्या है -
उत्तर - 13.
Q 4. राज्य में सम्भाग या मंडलों को संख्या कितनी है ?
उत्तर - 02.
Q 5. राज्य में विधान सभा की कितनी सीट है ?
उतर - 71.
Q 6. उत्तराखंड राज्य में लोकसभा की कितनी सीटे है ?
उत्तर - 05.
Q 7. उत्तराखंड राज्य में विधान सभा की सुरक्षित (रिज़र्व) सीटे कितनी है ?
उत्तर - 15 (13 SC + 2 ST).
Q 8. उत्तराखंड राज्य में राज्यसभा की कितनी सीटे है ?
उत्तर - 03.
Q 9.  उत्तराखंड राज्य में विकास खंडो की संख्या कितनी है ?
उत्तर - 95.
Q 10. उत्तराखंड में लोकसभा की सुरक्षित सीटे कितनी है ?
उत्तर - 1 SC.
Q 11. उत्तराखंड राज्य का उच्च न्यायालय कहा स्थित है ?
उत्तर - नैनीताल.
Q 12. उत्तराखंड राज्य में तहसीलों की संख्या कितनी है ?
उत्तर - 110.
Q 13. उत्तराखंड राज्य में नगर निगमों की संख्या कितनी है ?
उत्तर - 08.
Q 14. उत्तराखंड राज्य में नगर पालिका परिषद की संख्या कितनी है ?
उत्तर - 39.
Q 15. उत्तराखंड  राज्य में नगर पंचायतो की संख्या कितनी है ?
उत्तर - 47.
Q 16. उत्तराखंड राज्य में न्याय पंचायतो की संख्या कितनी है ?
उत्तर - 670.
Q 17. उत्तराखंड राज्य में ग्राम पंचायतो की संख्या कितनी है ?
उत्तर - 7950.
Q 18. उत्तराखंड की राजकीय भाषा है ?
उत्तर - हिंदी (दूसरी भाषा संस्कृत).
Q 19. उत्तराखंड का राजकीय पशु है -
उत्तर - कस्तूरी मृग.
Q 20. राज्य का राजकीय पक्षी है -
उत्तर - मोनाल.
Q 21. उत्तराखंड का राजकीय वृक्ष है -
उत्तर - बुरांश.
Q 22. उत्तराखंड राज्य का रास्ट्रीय पुष्प है -
उत्तर - ब्रह्मकमल.
Q 23. उत्तराखंड का राजकीय चिन्ह है -
उत्तर - एक गोलाकार मुद्रा में तीन पर्वत चोटियों की श्रंखला और उसके नीचे गंगा की चार लहरों को दिखाया
गया है बीच वाली चोटी के मध्य में अशोक का लाट है और उसके नीचे 'सत्यमेव जयते' लिखा है.
Q 24. उत्तराखंड का राजकीय खेल है -
उत्तर - फूटबाल.
Q 25. उत्तराखंड  राज्य की सीमाए किन किन देशो से मिली हुई है  -
उत्तर - चीन , नेपाल.

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान - Uttrakhand GK Question in Hindi | UK GK In Hindi -


Q 26. उत्तराखंड राज्य की सीमाए किन राज्यों से लगी हुई है  -
उत्तर - उत्तर प्रदेश , हिमाचल प्रदेश.
Q 27. चिपको आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था ? -
उत्तर - पेड़ो की अंधाधुन्द कटाई को रोकना.
Q 28. बौद्ध ग्रंथो में उत्तराखंड को किस नाम से उल्लेखित किया गया है  -
उत्तर - हिमवंत .
Q 29 उत्तराखंड राज्य का सबसे बड़ा कारखाना कहा स्थित है  -
उत्तर - लालकुआ नैनीताल में.
Q 30. उत्तराखंड में 'हुक्का क्लब' कहाँ स्थित है   -
उत्तर - अल्मोड़ा में.
Q 31.  भारत का प्रथम रास्ट्रीय पार्क कौन सा है -
उत्तर - जिम कार्बेट रास्ट्रीय पार्क.
Q 32. उत्तराखंड में सार्वाधिक पुरुष साक्षरता वाला जिला कौन सा है  -
उत्तर - रुद्रप्रयाग (94.97%).
Q 33. उत्तराखंड में न्यूनतम पुरुष साक्षरता वाला जिला कौन सा है-
उत्तर - हरिद्वार (82.36 %).
Q 34. उत्तराखंड के किस शहर को पहाड़ो की रानी कहा जाता है   -
उत्तर - मसूरी.
Q 35. उत्तराखंड को प्रभावित करने वाली आपदा कौन सी है -
उत्तर - भूस्खलन एवं बाढ़.
Q 36.  उत्तराखंड का सार्वाधिक जनसंख्या वाला नगर कौन सा है -
उत्तर - देहरादून.
Q 37. उत्तराखंड राज्य का कूल कितना भाग पर्वतीय क्षेत्र है  -
उत्तर - 86.07 %.
Q 38. उत्तराखंड राज्य का सर्वाधिक  क्षेत्रफल वाला जिला है -
उत्तर - चमोली .
Q 39. उत्तराखंड राज्य का  सबसे बड़ा हिमनंद है -
उत्तर - गंगोत्री.
Q 40. उत्तराखंड राज्य में कूल कितने रास्ट्रीय राजमार्ग है  -
उत्तर - 14.
Q 41. उत्तराखंड में कृषि योग्य भूमि लगभग कितनी है  है -
उत्तर - 13 % .
Q 42.  उत्तराखंड राज्य सार्वाधिक क्षेत्रफल पर कौन सी फसलो की खेती की जाती है -
उत्तर - गेंहू व चावल.
Q 43  राज्य का वह कौन सा जिला है जो सेब के उत्पादन के लिए प्रशिद्ध  है -
उत्तर - उत्तरकाशी.
Q 44. राज्य का सबसे छोटा रास्ट्रीय राजमार्ग है  -
उत्तर - NH 72.
Q 45. उत्तराखंड का सबसे ऊँचा बाँध  है -
उत्तर - टिहरी बाँध .
Q 46. उत्तराखंड राज्य का सबसे बड़ा रास्ट्रीय उद्यान कौन सा है  -
उत्तर - गंगोत्री रास्ट्रीय उद्यान .
Q 47.  उत्तराखंड में 'लीची नगर' नाम से प्रशिद्ध है -
उत्तर - देहरादून .
Q 48. उत्तराखंड में 'छोटा कश्मीर' नाम से प्रशिद्ध है -
उत्तर - पिथोरागढ़.
Q 49. उत्तराखंड में 'झीलों का नगर' नाम से प्रशिद्ध है -
उत्तर - नैनीताल .
Q 50. बदरीनाथ किस नदी के तट पर बसा हुआ  है -
उत्तर - अलकनंदा .

आशा करते है हमारे द्वरा दी गयी " Uttrakhand GK IN Hindi , Uttrakhand GK Question in Hindi | उत्तराखंड सामान्य ज्ञान  " की जानकारी आपको  अच्छी लगी होगी . इस   विषय से जुड़ा कोई भी प्रश्न पूछने के लिए कमेंट करे . और इस पोस्ट को हो सके तो शेयर जरूर करे .

Friday, July 19, 2019

गुरुत्वाकर्षण - भौतिक विज्ञान सामान्य ज्ञान | Gravity - Physics General Science GK in Hindi | Science GK in Hindi -

जैसा की हम सब जानते है जब भी हम कोई वस्तु ऊपर फेंकते है तो वह वस्तु वापिस पृथ्वी पर ही आकार गिरती है . प्रथ्वी द्वारा किसी वस्तु (पिंड) को अपनी और खीचने की शक्ति (क्षमता) को ही गुरुत्व (Gravity) कहते है .

गुरुत्वाकर्षण - भौतिक विज्ञान सामान्य ज्ञान | Gravity - Physics General Science GK in Hindi | Science GK in Hindi -

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम क्या है / What is Newton's law of Gravitation -

किन्ही दो पिंडो के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उन पिंडो के द्रव्यमानो के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दुरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है .

माना दो पिंड जिनके द्रव्यमान m1 एवं m2 है , एक दुसरे से R दुरी पर स्थित है , तो न्यूटन के नियमानुसार उनके बीच लगने वाला आकर्षण बल , F = G * m1*m2 / R. होता है . जहाँ G एक नियतांक (Constant) है. जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते है और जिसका मान 6.67*10^(-11) Nm^2/Kg^2 होता है .

गुरुत्व (Gravity) किसे कहते है - 

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियमानुसार दो पिंडो के बीच एक आकर्षण बल कार्य करता है . यदि इनमे से एक पिंड पृथ्वी हो तो पृथ्वी द्वरा पिंड को अपनी और खीचने के लिए  जो बल लगाया जाता है   इस आकर्षण बल को ही गुरुत्व बल कहते है . इस बल के कारण ही पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपने केंद्र की और खिचती है .इस बल के कारण जो त्वरण उत्पन्न होता है , उसे गुरुत्वजनित  त्वरण (g) कहते है इसका मान 9.8 m/s^2 होता है .

गुरुत्वजनित  त्वरण (g) वस्तु के आकार , द्रव्यमान , आकार , आदि पर निर्भर नही करता है .

गुरुत्वजनित  त्वरण (g) के मान में परिवर्तन कैसे होता है -

  1. पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने एवं नीचे जाने पर g का मान घटता है .
  2. 'g' का मान अधिकतम पृथ्वी के ध्रुवो पर होता है.
  3. 'g' का मान न्यूनतम विषुवत रेखा पर होता है.
  4. यदि पृथ्वी की घूर्णन गति बढ़ हो जाए तो 'g' का मान घट जाता है .
  5.  यदि पृथ्वी की घूर्णन गति कम हो जाए तो 'g' का मान बढ़ जाता है .
यदि पृथ्वी अपनी कोणीय चाल से 17 गुणा ज्यादा घुमने लग जाए तो विषुवत रेखा पर रखी वस्तु का भार शून्य (0) हो जायेगा.

ग्रहों की गति से सम्बंधित केप्लर के कुछ प्रमुख नियम -

  • प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारो और दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करता है तथा सूर्य ग्रह की कक्षा के एक फोकस बिंदु पर स्थित होता है .
  • प्रत्येक ग्रह का क्षेत्रीय वेग नियत रहता है . इसका प्रभाव यह होता है की जब ग्रह सूर्य के निकट होता है , तो उसका वेग बढ़ जाता है और जब वह दूर होता है , तो उसका वेग कम हो जाता है .
  • जितने समय में कोई ग्रह सूर्य का एक चक्कर लगाता है , उसे उसका परिक्रमण काल (T) कहते है , परिक्रमण काल T का वर्ग (T^2) ग्रह की सूर्य से ओसत दुरी (r) के घन (r^3) के अनुक्रमानुपाती होती है , अर्थात T^2 ∝ r^3.
अर्थात ग्रह की दुरी सूर्य से जितनी दूर होगी उसका परिक्रमण काल का समय भी उतना अधिक होगा . सबसे कम परिक्रमण काल बुद्ध ग्रह का 88 दिन है जबकि सबसे ज्यादा परिक्रमण काल वरुण ग्रह 165 वर्ष है .

उपग्रह ( Satellite) किसे कहते है -

किसी ग्रह की परिक्रमा करने वाले किसी पिंड को उपग्रह कहते है . जैसे चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है इसलिए यह पृथ्वी का उपग्रह कहलाता है .

उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed of Satellite) से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी -

  • उपग्रह की कक्षीय चाल उसकी पृथ्वी तल से उंचाई पर निर्भर करती है . उपग्रह पृथ्वी तल से जितना दूर होगा , उतनी ही उसकी चाल कम होगी .
  • उपग्रह की कक्षीय चाल उसके द्रव्यमान पर निर्भर नही करती है . एक ही कक्षा में भिन्न - भिन्न द्र्व्यमानो के उपग्रहो की चाल समान होगी.
  • पृथ्वी तल के अति निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 8 किमी० / सेकंड होता है .

उपग्रह का परिक्रमण काल ( Period Of Revolution of Satellite) क्या होता है -

उपग्रह अपनी कक्षा में ग्रह का चक्कर जितने समय में लगाता है उसे उसका परिक्रमण काल कहते है .

अत: परिक्रमण काल = कक्षा की परिधि / कक्षीय चाल.

  • उपग्रह का परिक्रमण काल उसकी ग्रह के तल से उंचाई पर निर्भर करता है . और उपग्रह जितना अधिक दूर होगा उतना ही ज्यादा समय लेगा परिक्रमण करने के लिए .
  • उपग्रह का परिक्रमण काल उसके  द्रव्यमान पर निर्भर नही करता है .
  • पृथ्वी के सबसे निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह का परिक्रमण काल 1 घंटा 24 मिनट होता है .

भू - स्थाई उपग्रह ( Geo - Stationary Satellite) क्या होता  है -

वह उपग्रह जो पृथ्वी के अक्ष के लम्बवत तल में पश्चिम से पूरब की और पृथ्वी की परिक्रमा करता है तथा जिसका परिक्रमण काल पृथ्वी के परिक्रमण काल के बराबर होता है , भू - स्थायी उपग्रह कहलाता है . इसकी ऊंचाई पृथ्वी से लगभग 36000 किमी०  होती है .  

पलायन वेग क्या होता है -

यदि किसी पिंड को 11.2 किमी०/सेकंड वेग पृथ्वी से बहार की और फेंका जाए और वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है तो वह पिंड कभी भी पृथ्वी पर वापिस नही आयेगा . पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान 11.2 किमी०/सेकंड .

लिफ्ट में पिंड के भार के बढ़ने एवं घटने की जानकारी / Information about the increase and decrease of body weight in the lift -

  • जब लफत ऊपर की और जाती है तो लिफ्ट में स्थित पिंड का भार बढ़ा हुआ प्रतीत होता है .
  • जब लिफ्ट नीचे की और जाती है स्थित पिंड का भार घटा हुआ प्रतीत होता है .
  • जब लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या नीचे गति करती है तो लिफ्ट में स्थित पिंड के भार में कोई परिवर्तन नही प्रतीत होता है .
  • यदि नीचे की तरफ आते समय लिफ्ट की डोरी टूट जाए तो वह मुक्त पिंड की भांति नीचे गिरती है . ऐसी स्थिति में लिफ्ट में स्थित पिंड का भार शुन्य हो जाता है . यही भारहीनता की स्थिति है .
  • यदि नीचे आते समय लिफ्ट का त्वरण गुरुत्वीय तव्रण से अधिक हो तो लिफ्ट में स्थित पिंड उसकी फर्श से उठकर उसकी छत से जा लगेगा.
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UPSSSC Forest / Wild Guard Recruitment 2019 - 20 in हिंदी | उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग - वन रक्षक एवं वन्य जीव रक्षक भर्ती 2019

UPSSSC  Forest / Wild Guard Recruitment 2019 - 20 in हिंदी


UPSSSC Forest / Wild Guard Recruitment 2019 - 20 - Uttar Pardesh Subordinate Service  Selection Commission (UPSSSC)  Released Recruitment Notification For 665 Posts of Vanrakshak Forest Guard And Wild Life Guard Rakshak Recruitment 2019 . Interested Candidates Can Apply Before 08 July 2019. Before applying the candidacy online, read the terms and conditions of the qualifications properly and match the official notification.


UPSSSC वन / वाइल्ड गार्ड भर्ती 2019 - 20 - उत्तर परदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) वन रक्षक और वाइल्ड लाइफ गार्ड आरक्षक भर्ती 2019 के 665 पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी कर दी गयी है . इच्छुक उम्मीदवार 08 जुलाई 2019 से पहले आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने से पहले, योग्यता के नियमों और शर्तों को पढ़ें.

Short Details :

 UPSSSC  Forest / Wild Guard Recruitment 2019 - 20
 Vacany Details (पदों की जानकारी) 

 Name Of Post  - वन रक्षक एवं वन्य जीव रक्षक.
 Total Post - 665.

 Forest Guard.

  •  SC - 83.
  •  ST - 11.
  •  Gen - 370.
  •  OBC - 132.
 Wildlife Guard .

  • SC - 10.
  • ST -  02.
  • Gen - 45
  • OBC - 02.
 Educational Qualification (शैक्षिक योग्यता) 
  • मान्यता प्राप्त राज्य बोर्ड / केंद्रीय बोर्ड / यूनिवर्सिटी से 12th की परीक्षा पास या समकक्ष योग्यता .

 Fees (शुल्क)
  • General/OBC : Rs 185.
  • SC/ST : Rs 95.
  • PH : Rs 25.

 आवेदक एग्जाम शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम - नेट बैंकिंग ,  क्रेडिट कार्ड , डेबिट कार्ड एवं E चालान   के माध्यम  से कर सकते है .
 Age Limit (आयु सीमा)

    • कम से कम  18 वर्ष व अधिकतम  40 वर्ष.

      Age Relaxation(आयु में छुट)
    • सरकार के नियमानुसार एससी / एसटी / ओबीसी / पीडब्ल्यूडी / पीएच उम्मीदवारों को आयु में छूट दी जायेगी.


     Selection Procedure (चयन प्रक्रिया )
    • 1- लिखित परीक्षा 
    • 2- शारारिक मानक परीक्षण.
    • 3- शारारिक दक्षता परीक्षण.
    • 4 - चिकित्सीय परीक्षण. 
     Important Dates(महत्वपूर्ण  तिथि)
    • आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की तिथि : 18 जुलाई 2019.
    • आवेदन करने की अंतिम तिथि  : 08 अगस्त  2019.
    • आवेदन शुल्क जमा करने के अंतिम तिथि : 08 अगस्त 2019.
     How to Apply (कैसे आवेदन करे)
    • योग्य उम्मीदवार 08 अगस्त 2019 तक UPSSSC  की आधिकारिक वेबसाइट http://upsssc.gov.in/ पर logIn करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते है .
      Important Links 

    Thursday, July 18, 2019

    चुम्बकत्व - Physics General Science | Science GK in Hindi | भू - चुम्बकत्व , क्युरी ताप , डोमेन , चुम्बकीय पदार्थ , चुम्बकीय बल रेखाए , चुम्बकीय क्षेत्र , चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता

    चुम्बक एक ऐसा पदार्थ है जिसमे लोहे , कोबाल्ट तथा निकल के टुकडो को अपनी और आकर्षित (खीचने) की क्षमता होती है . जब इसे मुक्त रूप से लटकाया जाता है तो इसके किनारे उत्तर दक्षिण की और संकेत करते है . जब किसी चुम्बक के टुकड़े किये जाते है तो उनमे से प्रत्येक टुकड़ा एक स्वतंत्र चुम्बक बन जाता है . चुम्बक के दो ध्रूव होते है - उत्तर और दक्षिण दोनों में समान शक्ति होती है . समान ध्रुव एक - दुसरे से दूर भागते है तथा विपरीत ध्रुव एक - दुसरे को अपनी और खीचते है .

    चुबक्तव - Physics General Science | Science GK in Hindi | भू - चुम्बकत्व , क्युरी ताप , डोमेन , चुम्बकीय पदार्थ , चुम्बकीय बल रेखाए , चुम्बकीय क्षेत्र , चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता
    Source : Pixabay.com

    चुम्बक का लोहे , कोबाल्ट तथा निकिल के टुकडो को अपनी और खीचने का गुण चुम्बक कहलाता है . चुम्बक के सिरों के समीप चुम्बकत्व सबसे अधिक होता है . चुम्बक के ठीक मध्य में चुम्बकत्व नही होता है .


    • प्राकृतिक चुम्बक लोहे का आक्साइड (Fe3O4) है . इसका कोई निश्चित आकार नही होता है .
    • कृत्रिम विधियों द्वारा बनाए गए चुम्बक को कृत्रिम चुम्बक कहते है . कृत्रिम चुम्बक लोहे , इस्पात , कोबाल्ट आदि से बनाई जाती है . इसकी आकृति कई प्रकार की हो सकती है - जैसे छड चुम्बक , घोडानाल चुम्बक , चुम्बकीय सुई आदि.
    • यदि किसी चुम्बक को किसी क्षैतिज तल में स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर उसका एक ध्रुव सदैव ऊतर की और तथा दूसरा ध्रुव दक्षिण की ओर रहता है .
    • चुम्बक किसी चुम्बकीय पदार्थ में प्रेरणा (Induction) द्वारा चुम्बकत्व उत्पन्न कर देता है .

    चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) किसे कहते है -

    चुम्बक के चरों ओर का वह क्षेत्र जिसमे चुम्बक के प्रभाव का अनुभव किया जा सकता है उसे चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र कहते है .


    चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता   (Magnetic Field Intensity) क्या होती है -

    चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता - चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत एकांक लम्बाई का ऐसा चालक तार रखा जाए जिसमे एकांक प्रबलता की धारा प्रवाहित हो रही हो तो चालक पर लगने वाला बल ही चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता की माप होगी . चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता एक सदिस राशी है . इसका मात्रक न्यूटन / एम्पियर - मीटर अथवा वेबर/मी^2 या टेस्ला (T) होता है .

    चुम्बकीय बल रेखाए ( Magnetic Lines of Forces)  क्या होती है -

    चुम्बकीय क्षेत्र में बल रेखाएं वे काल्पनिक रेखाएं है , जो उस स्थान में चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को अविरत प्रदर्शन करती है . चुम्बकीय बल रेखा के किसी भी बिंदु पर खिचीं गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है .

    चुम्बकीय बल रेखाओ के प्रमुख गुण -
    1. चुम्बकीय बल रेखाये हमेशा चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलती है तथा वक्र बनाती हुई दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कर जाती है और चुम्बक के अन्दर से होती हुई फिर से उत्तरी ध्रुव पर वापस आती है .
    2. दो बल - रेखाए एक दुसरे को कभी भी नहीं काटती है .
    3. चुम्बकीय क्षेत्र जहाँ प्रबल होता है वहां बल रेखाएं पास - पास होती है .
    4. एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की बल रेखाएं परस्पर समांतर एवं बराबर दूरियों पर होती है .

    चुम्बकीय पदार्थ (Magnetic Substances) के कुछ प्रमुख प्रकार - 

    1. प्रति चुम्बकीय पदार्थ ( Dia - Magnetic Substances) -  प्रति चुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ है , जो चुम्बकीय क्षेत्र में  रखे जाते  है तो विपरीत दिशा में चुम्बकित  जाते है . प्रति चुम्बकीय पदार्थो के कुछ प्रमुख उदहारण है जैसे - जस्ता , बिसमित , तांबा , सोना , चांदी , हीरा , नमक , जल आदि .
    2. अनुचुम्ब्कीय पदार्थ ( Paramagnetic Substances ) -  अनु चुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ है , जो चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्षेत्र की  दिशा में थोड़ी सी ( कम से कम) चुम्बकीय हो  जाते है . अनुचुम्ब्कीय पदार्थो के कुछ प्रमुख उदाहरण है जैसे एल्युमीनियम , प्लैटिनम , सोडियम , क्रोमियम , आक्सीजन   आदि .
    3. लोह चुम्बकीय पदार्थ ( Ferromagnetic Substances) -  लोह चुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ है , जो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकित हो जाते   है . लोहा , निकिल , कोबाल्ट , इस्पात आदि लोह चुबकिय पदार्थो के कुछ प्रमुख  उदहारण  है .

    डोमेन (Domain) किसे कहते है -

    लोह चुम्बकीय पदार्थो में प्रत्येक परमाणु ही एक चुम्बक होता है तथा इन पदार्थो में असंख्य परमाणुओं के समूह होते है जीने डोमेन कहते है . एक डोमेन में 10^18 से 10^21 तक परमाणु होते है , लोह चुम्बकीय पदार्थो का तीव्र चुम्बकत्व इन डोमेनो के कारण ही होता है .

    क्युरी ताप (Curie Temprature) क्या होता है - 

    क्युरी ताप वह ताप है , जिसके ऊपर पदार्थ अनु चुम्बकीय व जिसके नीचे पदार्थ लोह चुम्बकीय होता है . लोहा एवं निकल के लिए क्युरी ताप का मान क्रमशः 770०C तथा 358०C होता है .
    • अस्थाई चुम्बक बनाने के लिए नर्म लोहे का प्रयोग किया जाता है .
    • स्थाई चुम्बक बनाने के लिए इस्पात (Steal) का उपयोग किया जाता है .

    भू - चुम्बकत्व (Terrestrial Magnetism) क्या होता  है - 

    किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को तीन तत्वों द्वारा व्यक्त किया जाता है - दिकपात कोण (angle of declination) , नमन कोण (angle of dip) तथा चुम्बकीय क्षेत्र क्षैतिज घटक ( horizontol component of earth's magnetic field) - 
    • दिकपात कोण (Angle of Declination) : किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के कोण को दिकपात कोण कहते है .
    • नमन कोण (Angle of Dip) : किसी स्थान पर पृथ्वी का सम्पूर्ण चुम्बकीय   क्षेत्र  तल के साथ जितना कोण बनता है , उसे उस स्थान का नमन कोण कहते है .  पृथ्वी के ध्रुव पर नमन कोण का मान 90०C तथा विषुवत रेखा 0०C रहता है .
    • चुम्बकीय क्षेत्र क्षैतिज घटक ( Horizontal Component of Earth's Magnetic Field) - पृथ्वी के सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक (H) अलग अलग स्थानों पर अलग अलग होता है . परन्तु इसका मान लगभग 0.4 गोस या  0.4*10^-4  टेस्ला  होता है .
    आशा करते है हमारे द्वरा दी गयी " चुबक्तव - Physics General Science | Science GK in Hindi | भू - चुम्बकत्व , क्युरी ताप , डोमेन , चुम्बकीय पदार्थ , चुम्बकीय बल रेखाए , चुम्बकीय क्षेत्र , चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता " की जानकारी आपको  अच्छी लगी होगी . इस   विषय से जुड़ा कोई भी प्रश्न पूछने के लिए कमेंट करे . और इस पोस्ट को हो सके तो शेयर जरूर करे .

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    Wednesday, July 17, 2019

    विधुत - भौतिक विज्ञानं सामान्य ज्ञान | (Electricity) - Physics General Knowledge in Hindi , Ohm's Law , Transformer , Generator , Motor Etc in Hindi

    विधुत वह उर्जा है जो उन आवेशो से बनती है जो परमाणु को बनाते है - ऋणात्मक आवेश युक्त इलेक्ट्रान (Negative Charge Electron) तथा धनात्मक आवेश युक्त प्रोटोन (Positive Charge Proton).

    विधुत  - भौतिक विज्ञानं सामान्य ज्ञान | (Electricity) - Physics General Knowledge in Hindi , Ohm's Law , Transformer , Generator , Motor Etc in Hindi

    विधुत धारा क्या होती है ?

    किसी विधुतीय आवेश के प्रवाह की गति को विधुत धारा कहते है . यह धनात्मक से ऋणात्मक दिशा में बहती है . अन्य आसान शब्दों में हम कह सकते है - किसी चालक में आवेश के प्रवाह की दर को विधुत धारा कहते है . विधुत धारा का S.I. मात्रक एम्पियर होता है . यह एक अदिश राशि है .मेन लाइन से घरो में हमें प्रत्यावर्ती धारा  (AC) प्राप्त होती है जबकि बटरी से प्राप्त होने वाली धारा को को दिष्ट धारा (DC) कहा जाता है .

    रेडियो , टेलीविजन , कंप्यूटर एवं अन्य उपकरणों को (DC) धारा की जरूरत होती है . इनमे कनवर्टर लगा होता है जो AC को DC में बदलता है .

    एक एम्पियर विधुत धारा का मान -

    जब किसी चालक तार में 1 एम्पियर की विधुत धारा प्रवाहित हो रही हो तो इसका मतलब है की उस चालक तार में प्रति सेकंड 6.25*10^18 इलेक्ट्रान एक सिरे से अन्दर जाते है तथा दुसरे सिरे से बहार निकल जाते है .

    प्रतिरोध क्या होता है / What is Resistance ?

    जब किसी चालक में विधुत धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक के परमाणुओं तथा अन्य कारको के द्वारा 
    उत्पन्न बाधा / अवरोध को चालक का प्रतिरोध कहते है . इसका SI मात्रक ओम होता है .

    ओम का नियम क्या है  / What Is Ohm's Law -

    यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था जैसे - ताप आदि में कोई परिवर्तन ना हो तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवानतर (V) वोल्ट तथा इसमें प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होता है . यदि किसी चालक के दो बिन्दुओ के बीच विभवान्तर V वोल्ट हो तथा उसमे प्रवाहित धारा (I) एम्पियर हो , तो ओम (Ω)  के नियमानुसार -

    V ∝ I या V = R I .
    जहाँ R एक  नियतांक (कांस्टेंट) है . जिसे चालक का प्रतिरोध भी कहते है .

    प्रतिरोध के प्रकार -

    # ओमीय प्रतिरोध -

    जो चालक ओम के नियम का पालन करते है , उनके प्रतिरोध को ओमीय प्रतिरोध कहते है . उदहारण - मैंगनीज का तार .

    # अनओमीय प्रतिरोध -

    जो चालक ओम के नियम का पालन नही करते है , उनके प्रतिरोध को अनओमीय प्रतिरोध कहते है . उदहारण - डायोडबल्ब का प्रतिरोध.

    विधुत का तापीय प्रभाव क्या होता है  -

    जब विधुत धारा  किसी उच्च अवरोध (Resistant) वाले धातु के पतले तार से होकर गुजरती है तब तार गर्म होकर चमकने लगता है . जैसे टंगस्टन धातु विधुत प्रवाह में अवरोध उत्पन करती है . ये गर्म होकर सफेद हो जाती है . इस प्रकार विधुत धारा द्वारा प्रकाश उत्पन्न किया जाता है . विधुत बल्ब एवं विधुत हीटर के एलिमेंट ऐसी धातुओ से बनाये जाते है जिनमे उच्च प्रतिरोध यानी ( High Resistant ) होता है .

    विधुत का चुम्बकीय प्रभाव क्या होता है -

    जब विधुत धारा किसी Coil (कुंडलीनुमा तार) से होकर गुजरती है तो वह चुम्बक का गुण धारण कर लेता है . यह विधुत धारा  द्वरा बनाये गए चुम्बकीय क्षेत्र के कारण होता है .

    विधुत के प्रकार -

    # स्थिर विधुत -

    वह विधुत धारा जो घर्षण या दो असमान वस्तुओ को रगड़ने के द्वारा उत्पन्न होती है स्थिर विधुत कहलाती है . वस्तुओ की प्रकृति के कारण एक वस्तु धनात्मक आवेश तथा दूसरी ऋणात्मक आवेश उत्पन्न करती है इसका कारण वस्तुओ के बीच इलेक्ट्रान का आदान - प्रदान होता है .

    उदाहरण - जब शीशे की कोई छड रेशम के कपडे के सम्पर्क में लायी जाती है और उस पर रगड़ी जाती है तब उस छड के कुछ इलेक्ट्रान रेशम के कपडे में चले जाते है जिसके कारण छड इलेक्ट्रान खो देती है और वह धनात्मक आवेश युक्त हो जाती है जबकि रेशम का कपडा इलेक्ट्रान प्राप्त करने के कारण ऋणात्मक आवेश युक्त बन जाता है .

    # विधुत प्रवाह -

    वह प्रवाह जो घरो में बिजली प्रदान करता है विधुत प्रवाह कहलाता है . इसके दो प्रकार होते है - (1) प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current) एवं (2) दिष्ट धारा (DC) . 

    फ्यूज वायर क्या होता है / What Is Fuse Wire -

    फ्यूज वायर (तार) ऐसी धातु का बनाया जाता है जो बहुत जल्दी पिंघल जाती हो . जब इसे किसी विधुत परिपथ (Electric Circuit) में लगाया जाता है तो विधुत धारा इससे होकर गुजरती है ज्यादा लोड पड़ने पर यह पिंघल कर टूट जाता है जिससे आगे सर्किट में सप्लाई बंद हो जाती है . और हमारे घरेलू उपकरण ख़राब होने से  बच जाते है .

    विधुत विभव क्या होता है -

    धनात्मक आवेश को अनन्त से विधुत क्षेत्र के किसी बिंदु पर  में लाने में किये गए कार्य एवं आवेश के मान के अनुपात को उस बिंदु का विधुत विभव कहा जाता है . इसका इकाई मात्रक वोल्ट होता है . यह एक अदिस रासी है .

    विभवान्तर क्या होता है -

    एक कूलाम धनात्मक आवेश (Positive Charge) को विधुत क्षेत्र में एक बिंदु से दुसरे बिंदु तक ले जाने में किये गए कार्य को उन बिन्दुओ के मध्य विभवान्तर कहते है . इसका मात्रक वोल्ट होता है . यह एक अदिस राशी है .

    चालकता क्या होती है / What is Conductance - 

    किसी चालक के प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उसकी चालकता कहते है . इसे G द्वारा निरुपित किया जाता है . G = 1 / R. चालकता का इकाई मात्रक  Ω−1 Ohm Inverse (ओम का व्युत्क्रम) होता है . इसे मुहो भी कहते है .

    विशिष्ट प्रतिरोध (Specific Resistant) किसे कहते है -

    किसी चालक का प्रतिरोध उसकी लम्बाई के अनुक्रमानुपाती तथा उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है .  यदि की चालक की लम्बाई l और उसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A है , 
    तो - ∝ 1 / A.
    या R = ρ 1/A जहाँ ρ एक नियतांक (Constant) है . जिसे चालक का विशिष्ट प्रतिरोध कहा जाता है .

    विशिष्ट चालकता (Conductivity) क्या होती है -

    किसी चालक के विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को चालक की विशिष्ट चालकता कहते है . जिसे σ से निरुपित किया जाता है व इसका SI   मात्रक ओम मीटर ^ (- 1) होती है Ω−1 m −1 होती है .

    प्रतिरोधों का संयोजन ( Combination Of Resistance ) क्या होता है -

    समान्यत: दो या दो से अधिक प्रतिरोधो को दो प्रकार से जोड़ा ( Connect ) जा सकता है - (i) श्रेणी क्रम (Series Combination) व (ii) समांतर क्रम ( Parallel Combination) .

    Series Combination (श्रेणी क्रम) में जोड़े गए प्रतिरोधो ( Resistance) के  का मान सभी प्रतिरोधो के के योग के बराबर होता है .

    R = R1 + R2 + R3 ......... + Rn.
    Parallel Combination ( समांतर क्रम) में जोड़े गए प्रतिरोधो ( Resistance) का व्युत्क्रम (Inverse)  का  मान सभी प्रतिरोधो के व्युत्क्रम (Inverse) के योग के बराबर होता है .

    1 / R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3 ........... + 1/RN.

    विधुत शक्ति ( Electric Power ) किसे कहते है -

    किसी विधुत परिपथ में उर्जा के क्षय ( खर्च ) होने की दर को शक्ति ( Power ) कहते है . विधुत शक्ति का SI मात्रक वाट होता है .

    विधुत परिपध ( Electric Circuit) में  यूनिट (Unit) कैसे मापते है -

    हमारे घरो में बिजली खर्च होने की दर को मापने के लिए मीटर लगा होता है जिसे यूनिट में मापा जाता है .
    1 किलो वाट घंटा मात्रक अथवा 1 यूनिट विधुत उर्जा की वह मात्रा है , जो किसी विधुत परिपथ में 1 घंटे में व्यय ( खर्च ) होती है . जबकि परिपथ में 1 किलो वाट की शक्ति (Load) होना चाहिए .

    यानी अगर घर में 1 किलो वाट का लोड (जैसे TV , फ्रिज , पंखे , बल्ब) चल रहा है तो 1 घंटे में 1 यूनिट बिजली खर्च होगी .

    यूनिट (Unit) कैसे निकालते (Calculate) है -

    किलोवाट घंटा मात्रक (1 यूनिट ) = वोल्ट * एम्पियर * घंटा / 1000 
    = वाट * घंटा / 1000.
    इस तरह से हम यूनिट की गणना (Calculate) कर सकते है .

    अमीटर (Ammeter) या एम्पियर मीटर  क्या होता है -

    विधुत धारा को एम्पियर में मापने के लिए अमीटर नामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है . इसे विधुत परिपथ ( Electric Circuit ) में सदैव श्रेणीक्रम  ( Serial) में लगाया जाता है . इसे एम्पियर मीटर भी खा जाता है . एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शुन्य होना चाहिए.

    वोल्टमीटर ( Voltameter ) क्या होता है -

    किसी विधुत परिपथ में किन्ही दो बिन्दुओ के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर का प्रयोग किया जाता है . इसे विधुत परिपथ ( Electric Circuit ) में सदैव समान्तर क्रम ( Parallel) में लगाया जाता है . एक आदर्श वोल्टमीटर का का प्रतिरोध अनन्त होना चाहिए.

    गल्वेनोमीटर ( Galvanometer ) क्या होता है -

    विधुत परिपथ में विधुत धारा की उपस्थिति बताने वाला एक यंत्र है . इसकी सहायता से हम 10^(-6) एम्पियर तक की विधुत धारा को मापा जा सकता है .

    ट्रांसफार्मर ( Transformer) क्या होता है -

    ट्रांसफार्मर एक ऐसा विधुत यंत्र है जो विधुत चुम्बकीय प्रेरण के सिधान्त पर कार्य करता है . यह उच्च (High) A.C. Voltage को निम्न (Low) A.C. Voltage में तथा निम्न (Low) A.C. Voltage को उच्च (High) A.C. Voltage में बदलने के लिए प्रयोग किया जाता है .

    जनरेटर ( Generator ) क्या होता है -

    यह भी विधुत चुम्बकीय प्रेरण के सिधान्त पर कार्य करता है . जनरेटर यांत्रिक उर्जा को विधुत उर्जा में बदलने का कार्य करता है .

    विधुत मोटर ( Electric Motor ) क्या होता है -

    यह एक प्रकार का विधुत यंत्र है जो विधुत उर्जा को यांत्रिक उर्जा में परिवर्तित करता है . लेकिन यह  विधुत चुम्बकीय प्रेरण के सिधान्त पर कार्य नही करता है .

    माइक्रोफोन ( Microphone) किसे कहते है -

    यह एक प्रकार का यंत्र है जो की ध्वनी उर्जा को विधुत उर्जा में परिवर्तित करता है . माइक्रोफोन विधुत चुम्बकीय प्रेरण के सिधान्त पर कार्य करता है .

    लाउड स्पीकर या स्पीकर ( Loud Speaker / Speaker ) किसे कहते है -

    यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है जो इलेक्ट्रिक सिग्नल को ऑडियो सिग्नल में बदलती है .


    आशा करते है हमारे द्वरा दी गयी " विधुत  - भौतिक विज्ञानं सामान्य ज्ञान | (Electricity) - Physics General Knowledge in Hindi , Ohm's Law , Transformer , Generator , Motor Etc in Hindi " की जानकारी आपको  अच्छी लगी होगी . इस   विषय से जुड़ा कोई भी प्रश्न पूछने के लिए कमेंट करे . और इस पोस्ट को हो सके तो शेयर जरूर करे .

    Sunday, July 14, 2019

    SSC Junior Hindi Translator Exam Pattern & Syllabus In Hindi -

    आज हम इस आर्टिकल के द्वारा आपको SSC JHT (Junior Hindi Translator)   के परीक्षा प्रारूप (Exam Pattern) , पाठ्यक्रम (Syllabus) की जानकारी दे रहे है . यदि आप भी SSC JHT (Junior Hindi Translator) Exam  की तैयारी कर रहे है इस आर्टिकल को जरूर पढ़े . यहाँ आपको SSC JHT (Junior Hindi Translator) एग्जाम के  पैटर्न (Pattern) , सिलेबस (Syllabus) की पूरी जानकारी मिलेगी.


    SSC Junior Hindi Translater Exam Pattern & Syllabus In Hindi -


    SSC द्वारा प्रत्येक वर्ष SSC JHT (Junior Hindi Translator) की परीक्षा का आयोजन किया जाता है जिसके द्वारा सरकारी विभागों  में Hindi Translator , Junior Hindi Translator , Senior Hindi Translator आदि  के रिक्त पदों को भरा जाता है . यदि आप भी सरकारी जूनियर इंजिनियर बनना चाहते है तो आप भी SSC JHT (Junior Hindi Translator) की परीक्षा में शामिल हो सकते है . इसके लिए आपके पास 2 वर्षीय Master Degree In Hindi (हिंदी में परास्नातक / Post Graduation  ) एवं स्नातक हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों विषय होने जरूरी है .  

    SSC JHT (Junior Hindi Translator)  Exam Pattern -


    SSC JHT (Junior Hindi Translator)  की परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाती है . Paper - I और Paper - II . 

    Paper - I Exam Pattern :

    प्रथम चरण (Paper - I) के अंतर्गत एक कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer Based Examination) होती है . Paper - I में बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Type Question) पूछे जाते है . इसमें कूल दो भाग होते है - प्रथम भाग (First Part) में समान्य हिंदी (General Hindi) के 100 प्रश्न प्रत्येक प्रश्न के लिए एक अंक निर्धारित होता है . द्वित्य भाग (Second Part) में General English (अंग्रेजी भाषा) के 100 प्रश्न जिसमे प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का का होता है . प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.25 अंक काट लिए जाते है .

    इस पेपर को करने के लिए आपको 2 घंटे का समय दिया जाता है . कंप्यूटर आधारित परीक्षा (पेपर- I) में अभ्यर्थियों द्वारा अंकित अंक कई पारियों में आयोजन के आधार पर  सामान्यीकृत (Normalized) किया जाएगा और इस तरह के सामान्यीकृत स्कोर होंगे अंतिम योग्यता निर्धारित करने के लिए उपयोग किया जाता है.


    SSC Junior Hindi Translater In Hindi -

    Paper - II Exam Pattern :


    Paper - I को पास करने वाले उमीदवारो को पेपर - ii के लिए बुलाया जाता है . यह एक ऑफलाइन परीक्षा होती है . जिसमे आपको पेपर और पेन का प्रयोग करना होता है . इसमें Descriptive Type Question (वर्णात्मक प्रकार के प्रश्न) पूछे जाते है . इसमें आपसे अनुवाद (Translation) और Essay (निबंद लेखन) से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है . यह पेपर कूल 200 अंको का होता है तथा इसके लिए आपको कूल 2 घंटे का समय दिया जाता है .


    SSC Junior Hindi Translater In Hindi -

    SSC JHT (Junior Hindi Translator) Exam Syllabus In Hindi -

    अभी उपर आपने SSC JHT (Junior Hindi Translator) Exam Pattern के बारे में जाना अब हम आपको SSC JHT (Junior Hindi Translator) Exam के Syllabus (पाठ्यक्रम ) के बारे में बताएँगे . किस किस टॉपिक से प्रश्न पूछे जाते है .


    SSC JHT Syllabus ( Paper - I ) - यह पेपर दो भागो में बटा होता है भाग - (I) समान्य हिंदी (General Hindi) , भाग - (II)  General English (सामान्य अंग्रेजी).

    इस पेपर में उम्मीदवारों का परीक्षण करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है जैसे  भाषा और साहित्य के बारे में , शब्दों, वाक्यांशों का सही उपयोग  और मुहावरे और भाषाओं को सही, सटीक और प्रभावी ढंग से लिखने की क्षमता . इस पेपर में सभी  प्रश्न Degree (स्नातक) स्तर के होंगे.

    SCC JHT Syllabus (Paper - II) - 

    इस पेपर में हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद , अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद , निबंद लेखन से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है .

    आशा करते है हमारे द्वरा दी गयी "SSC Junior Hindi Translater Exam Pattern & Syllabus In Hindi" की जानकारी आपको  अच्छी लगी होगी . इस   विषय से जुड़ा कोई भी प्रश्न पूछने के लिए कमेंट करे . और इस पोस्ट को हो सके तो शेयर जरूर करे .

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    Saturday, July 13, 2019

    SSC Stenographer Previous Year Cut Off List In Hindi (Pdf -

    एसएससी कार्नर पर  आपका स्वागत है. आज हम इस पोस्ट के  माध्यम से आपके साथ एक बहुत महत्वपूर्ण जानकारी  शेयर करने जा रहे है . यदि  आप SSC Stenographer परीक्षा की तैयारी कर रहे है और आप इस परीक्षा में सफल होना चाहते है तो यह जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी होने वाली है . क्यूंकि आज हम पुराने वर्षो की  SSC Stenographer Previous Year Cut Off List की पूरी जानकारी आपके साथ शेयर करने वाले है . SSC Stenographer Cut Off List की पूरी जानकारी के लिए इस पोस्ट को अंत तक पढिए -
    SSC Stenographer Previous Year Cut Off List In Hindi Pdf -


    About SSC Stenographer Exam -

    SSC द्वारा प्रत्येक वर्ष SSC Stenographer की परीक्षा का आयोजन किया जाता है जिसके द्वारा सरकारी विभागों  Stenographer (आशुलिपिक) के रिक्त पदों को भरा जाता है . यदि आप भी सरकारी Stenographer (आशुलिपिक) बनना चाहते है तो आप भी SSC Stenographer की परीक्षा में शामिल हो सकते है . इसके लिए आपको मान्यता प्राप्त राज्य बोर्ड /  केन्द्रीय बोर्ड  से कक्षा 12 वीं की परीक्षा पास करना आवश्यक है .

    Read Also - SSC Stenographer Exam Pattern & Syllabus In Hindi -

    SSC Stenographer Previous Year Cut Off In Hindi -

    # Candidates Qualified for Skill Test In Stenography For Stenographer Grade 'C' / स्टेनोग्राफर ग्रेड 'सी ’के लिए स्टेनोग्राफी में कौशल परीक्षा के लिए योग्य उम्मीदवार -

     SSC Stenographer ( 2018 ) Cut Off  
     Category Cut Off Marks Qualify Candiadtes
     GEN 138.00 3994
     OBC 133.00 3420
     SC 119.00 1758
     ST 105.00 784
     VH  88.00 100
     OH  90.00 288
     Other 40.00 79
     Total   - 10423

    Candidates Qualified for Skill Test In Stenography For Stenographer Grade 'D' / स्टेनोग्राफर ग्रेड 'डी ’के लिए स्टेनोग्राफी में कौशल परीक्षा के लिए योग्य उम्मीदवार -

     SSC Stenographer ( 2018 ) Cut Off  
     Category Cut Off Marks Qualify Candiadtes
     GEN 134.00 5067
     OBC 130.00 4257
     SC 113.00 2430
     ST 97.00 1139
     VH 56.00 219
     OH 90.00 271
     Other 40.00 75
     Total   - 13568


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    Friday, July 12, 2019

    SSC JE Previous Year Cut Off - 2018 , 2017 in Hindi Pdf - Full Details

    एसएससी कार्नर पर  आपका स्वागत है . आज हम इस पोस्ट के  माध्यम से आपके साथ एक बहुत महत्वपूर्ण जानकारी  शेयर करने जा रहे है . यदि  आप SSC JE परीक्षा की तैयारी कर रहे है और आप इस परीक्षा में सफल होना चाहते है तो यह जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी होने वाली है . क्यूंकि आज हम पुराने वर्षो की  SSC JE Previous Year Cut Off List की पूरी जानकारी आपके साथ शेयर करने वाले है . SSC JE Cut Off List की पूरी जानकारी के लिए इस पोस्ट को अंत तक पढिए -

    SSC JE Previous Year Cut Off - 2018 , 2017 in Hindi Pdf - Full Details

    SSC द्वारा प्रत्येक वर्ष SSC JE की परीक्षा का आयोजन किया जाता है जिसके द्वारा सरकारी विभागों  जूनियर इंजिनियर के रिक्त पदों को भरा जाता है . यदि आप भी सरकारी जूनियर इंजिनियर बनना चाहते है तो आप भी SSC JE की परीक्षा में शामिल हो सकते है . इसके लिए आपके पास 3 वर्षीय इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (Mechanical , Electrical , Civil) या 4 वर्षीय इंजीनियरिंग डिग्री (Mechanical , Electrical , Civil) होनी चाहिए .


    SSC JE Cut Off 2017 - 18 ( Paper - I) -


     Categories  Civil Engineering  Electrical Eng. / Mechanical Eng. 
     SC  101.75 120.00
     ST  105.00 114.50
     OBC  110.75 133.25
     GEN  117.00 136.25
     OH  91.50 113.00
     HH  61.75 83.50

    SSC JE 2017 - 18 Cut off (Paper 1 + Paper 2) -

    # SSC JE Cut Off 2017 -  18 Paper 1 एवं Paper 2 के लिए Cut Off (सिविल इंजीनियरिंग एंड क्वांटिटी सुरवेयिंग & कॉन्ट्रैक्ट इंजीनियरिंग / Civil and Quantity Surveying & Contract Engineering ) -

     Categories  Cut Off Marks (Paper i + ii) Candidate Available
     SC  220.75 197
     ST  228.00 147
     OBC  244.75 503
     GEN  244.75 420
     OH  231.25 07
     HH  152.00 06
     Total     - 1280

    # SSC JE Cut Off 2017 -  18 Paper 1 एवं Paper 2 के लिए Cut Off (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और मैकेनिकल / Electrical Engineering / Mechanical Engineering ) -

     Categories  Cut Off Marks (Paper i + ii) Candidate Available
     SC  268.50 44
     ST  265.50 21
     OBC  299.00 110
     GEN  303.50 132
     OH  247.50 03
     HH  164.75 09
     Total     - 319

    SSC JE 2016 , 2015 , 2014 , 2013 Cut Off  ( Paper I , Paper II) -

    # Civil Engineering Paper - I :

     Categories →
     / Year
       ↓ 
     SC   ST  OBC GEN OH HH
     2016 84.50  85.50  92.50  100.00  72.50  40.00
     2015 88.00 87.75 91.25 103.75 78.00 30.00 
     2014 75.75 70.00 82.00 93.75 69.00 40.00
     2013 66.25 63.50 70.50 78.00 60.00 40.00

    # Civil Engineering Paper - II :


     Categories →
     / Year
       ↓ 
     SC   ST  OBC GEN OH HH
     2016 164  163  186  220.50  139.50  87.50
     2015 88.00 87.75 91.25 103.75 78.00 30.00 
     2014 75.75 70.00 82.00 93.75 69.00 40.00
     2013 66.25 63.50 70.50 78.00 60.00 40.00

    # Mechanical / Electrical Engineering Paper I :

     Categories →
     / Year
       ↓ 
     SC   ST  OBC GEN OH HH
     2016 99.00  114.50  109.50  115.00  87.00  87.00
     2015 114.75  94.50 125.25 131 100.00 100.00 
     2014 102.50 105.50 109.50 117.50 93 93
     2013 88.75 93.75 94.75 100.75 77.25 77.25


    # Mechanical / Electrical Engineering Paper II :

     Categories →
     / Year
       ↓ 
     SC   ST  OBC GEN OH HH
     2015 114.75  94.50 125.25 131 100.00 100.00 
     2014 102.50 105.50 109.50 117.50 93 93
     2013 88.75 93.75 94.75 100.75 77.25
    77.25


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